जय राधा माधव, जय कुन्ज बिहारी (Jai Radha Madhav, Jai Kunj Bihari)

जय राधा माधव,

जय कुन्ज बिहारी

जय राधा माधव,

जय कुन्ज बिहारी

जय गोपी जन बल्लभ,

जय गिरधर हरी

जय गोपी जन बल्लभ,

जय गिरधर हरी

॥ जय राधा माधव...॥


यशोदा नंदन, ब्रज जन रंजन

यशोदा नंदन, ब्रज जन रंजन

जमुना तीर बन चारि,

जय कुन्ज बिहारी

॥ जय राधा माधव...॥


मुरली मनोहर करुणा सागर

मुरली मनोहर करुणा सागर

जय गोवर्धन हरी,

जय कुन्ज बिहारी

॥ जय राधा माधव...॥


हरे कृष्णा हरे कृष्णा,

कृष्णा कृष्णा हरे हरे

हरे कृष्णा हरे कृष्णा,

कृष्णा कृष्णा हरे हरे

हरे रामा हरे रमा,

रामा रामा हरे हरे

हरे रामा हरे रमा,

रामा रामा हरे हरे


हरे कृष्णा हरे कृष्णा,

कृष्णा कृष्णा हरे हरे

हरे कृष्णा हरे कृष्णा,

कृष्णा कृष्णा हरे हरे

हरे रामा हरे रमा,

रामा रामा हरे हरे

हरे रामा हरे रमा,

रामा रामा हरे हरे

........................................................................................................
होली क्यों मनाई जाती है

फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन होली मनाई जाती है। इस दिन पूरा देश अबीर-गुलाल और रंग में सराबोर रहता है। हर कोई एक-दूसरे पर प्यार के रंग बरसाते हैं। होली के रंगों को प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है।

प्रदोष व्रत की कथा (Pradosh Vrat Ki Katha )

प्राचीनकाल में एक गरीब पुजारी हुआ करता था। उस पुजारी की मृत्यु के बाद उसकी विधवा पत्नी अपने भरण-पोषण के लिए पुत्र को साथ लेकर भीख मांगती हुई शाम तक घर वापस आती थी।

सन्तान सप्तमी व्रत कथा (Santana Saptami Vrat Katha)

सन्तान सप्तमी व्रत कथा (यह भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को किया जाता है।) एक दिन महाराज युधिष्ठिर ने भगवान् से कहा कि हे प्रभो!

लागी लगन शंकरा - शिव भजन (Laagi Lagan Shankara)

भोले बाबा तेरी क्या ही बात है,
भोले शंकरा तेरी क्या ही बात है,

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।

यह भी जाने