लचकि लचकि आवत मोहन (Lachaki Lachaki Awat Mohan)

लचकि लचकि आवत मोहन,

आवे मन भावे

लचकि लचकि आवत मोहन,

आवे मन भावे

लचकि लचकि आवत मोहन


मोहन अधर धरत मुरली,

मोहन आधार धरत मुरली,

मधुर मधुर बाजे

लचकि लचकि आवत मोहन,

आवे मन भावे

लचकि लचकि आवत मोहन


श्रवण कुण्डल चपल दोलन,

मोर मुकुट चंद्र कलन

श्रवण कुण्डल चपल दोलन,

मोर मुकुट चंद्र कलन


मन्द हसनी, दिया के बसनी,

मन्द हसनी, दिया के बसनी,

मोहन मूरति राजे


लचकि लचकि आवत मोहन,

आवे मन भावे

लचकि लचकि आवत मोहन,

आवे मन भावे

लचकि लचकि आवत मोहन


भ्रुकुटी कुटिल कमल नयन,

अधर अरुण, मधुर बैन

भ्रुकुटी कुटिल कमल नयन,

अधर अरुण, मधुर बैन


गति गजेंद्र, चारु तिलक,

गति गजेंद्र, चारु तिलक

भाल पद साजे


लचकि लचकि आवत मोहन,

आवे मन भावे

लचकि लचकि आवत मोहन,

आवे मन भावे

लचकि लचकि आवत मोहन


लोचन दास श्याम रूप,

नख शिख शुभ अनूप

लोचन दास श्याम रूप,

नख शिख शुभ अनूप


रस की हूप निरसी वदनि,

रस की हूप निरसी वदनि,

कोटि मदन लाजे


लचकि लचकि आवत मोहन,

आवे मन भावे

लचकि लचकि आवत मोहन,

आवे मन भावे

लचकि लचकि आवत मोहन

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चैत्र महीना भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है, जिसे चैत्र माह में मनाया जाता है। इस दिन गणपति बप्पा की पूजा करने से भक्तों को सभी संकटों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। इस वर्ष भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी 17 मार्च 2025, सोमवार को मनाई जाएगी।

श्री चित्रगुप्त चालीसा (Shri Chitragupta Chalisa)

कुल गुरू को नमन कर, स्मरण करूँ गणेश ।
फिर चरण रज सिर धरहँ, बह्मा, विष्णु, महेश ।।

जय महाकाली शेरावाली, सारे जग की तू रखवाली (Jai Mahakali Sherawali Saare Jag Ki Tu Rakhwali)

जय महाकाली शेरावाली,
सारे जग की तू रखवाली,

दिन जिंदगी के चार, चाहे कम देना (Din Jindagi ke Char Chahe kam dena)

दिन जिंदगी के चार,
चाहे कम देना,

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