लागी लागी है लगन म्हाने श्याम नाम की (Lagi Lagi Hai Lagan Mahne Shyam Naam Ki)

लागी लागी है लगन,

म्हाने श्याम नाम की,

भागी भागी म्हारे हिवड़े ने,

यारी श्याम की,

म्हारे नैणा के झरोखें में है,

सूरत श्याम की,

भागी भागी म्हारे हिवड़े ने,

यारी श्याम की ॥


श्याम की धुन में मगन रवा म्हे,

नित सांवरिये का भजन करा म्हे,

है खुराक श्याम नाम माला,

सुबह शाम की,

भागी भागी म्हारे हिवड़े ने,

यारी श्याम की ॥


मिटे ना मिटाया प्रीत और गहरी हो गई,

प्रेम रोग लाग्यो मैं तो बन गई जोगी,

मैं तो रंगली म्हारी चुनड़ीया,

श्याम नाम की,

भागी भागी म्हारे हिवड़े ने,

यारी श्याम की ॥


ओरा ने बुलावा जद करे है बहानो,

श्याम ही जाणे सांचो साथ निभानो,

झूठी दुनिया की प्रीत,

‘गोलू’ काई काम की,

भागी भागी म्हारे हिवड़े ने,

यारी श्याम की ॥


लागी लागी है लगन,

म्हाने श्याम नाम की,

भागी भागी म्हारे हिवड़े ने,

यारी श्याम की,

म्हारे नैणा के झरोखें में है,

सूरत श्याम की,

भागी भागी म्हारे हिवड़े ने,

यारी श्याम की ॥

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जिसको राम नाम रटना पसन्द है (Jisko Ram Naam Ratna Pasand Hai)

जिसको राम नाम रटना पसन्द है,
उसको हर घड़ी आनंद ही आनंद है ॥

तेरे चरण कमल में श्याम(Tere Charan Kamal Mein Shyam)

तेरे चरण कमल में श्याम,
लिपट जाऊ राज बनके ।

रूक्मिणी-श्रीकृष्ण के विवाह से जुड़ी कथा

पौष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रुक्मिणी अष्टमी के पर्व के रूप में मनाया जाता है, जो इस साल 22 दिसंबर को पड़ रही है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण की पहली पत्नी देवी रुक्मिणी के जन्म की याद में मनाया जाता है।

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