लौट के आजा नंद के दुलारे(Laut Ke Aaja Nand Ke Dulare)

लौट के आजा नंद के दुलारे,

उम्मीद लगाए,

ना जाने मेरो,

लाला कब आए ॥


लौट के आजा नंद के दुलारे,

मैया यशोदा तुझको पुकारे,

मैया यशोदा तुझको पुकारे ॥


अक्रूर आया मेरे दिल का,

वो टुकड़ा ले गया,

चांदनी चकोरी में,

चाँद का वो टुकड़ा ले गया,

दर्शन को तरसे,

दर्शन को तरसे,

नैन बिचारे,

मैया यशोदा तुझको पुकारे,

मैया यशोदा तुझको पुकारे ॥


मधुवन है सुना सुना,

सुनी है सारी वो नगरीया,

प्यासे है व्याकुल नैना,

आ जाओ बांके ओ बिहारी,

यादो में तुम्हरी,

यादो में तुम्हरी रोए,

नैन हमारे,

मैया यशोदा तुझको पुकारे,

मैया यशोदा तुझको पुकारे ॥


लौट के आजा नंद के दुलारें,

मैया यशोदा तुझको पुकारे,

मैया यशोदा तुझको पुकारे ॥

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लेके गौरा जी को साथ भोले-भाले भोले नाथ(Leke Gaura Ji Ko Sath Bhole Bhale Bhole Nath)

लेके गौरा जी को साथ,
भोले-भाले भोले नाथ,

सुन राधिका दुलारी में (Sun Radhika Dulari Main)

सुन राधिका दुलारी में,
हूँ द्वार का भिखारी,

कोई ऐसी खोल नहीं है (Koi Aisi Khol Nahin)

कोई ऐसी खोल नहीं है,
जिसमें तू छुप पायेगा ॥

नरसिंह द्वादशी व्रत विधि

नरसिंह द्वादशी सनातनियों का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो भगवान विष्णु के अवतार नरसिंह को समर्पित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, अपने प्रिय भक्त प्रहलाद की रक्षा करने के लिए भगवान विष्णु ने रौद्र रूप में अवतार लिया था, जिन्हें लोग आज नरसिंह भगवान के रूप में पूजते हैं।

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