ॐ शंकर शिव भोले उमापति महादेव (Shankar Shiv Bhole Umapati Mahadev)

शंकर शिव भोले उमापति महादेव

शंकर शिव भोले उमापति महादेव

पालनहार परमेश्वर, विश्वरूप महादेव

पालनहार परमेश्वर, विश्वरूप महादेव

महादेव, महादेव, महादेव...


महेशम् सुरेशम सुरारती नाशम, सुरारती नाशम

विभूम विश्वनताम, विभुत्यांग भूषं

विभूम विश्वनताम, विभुत्यांग भूषं

तिरूपाक्षहमितवार कृपहुँ त्रिनेत्रम

तिरूपाक्षहमितवार कृपहुँ त्रिनेत्रम

सदानन्द निमें प्रभु पंचबद्रम

सदानन्द निमें प्रभु पंचबद्रम

नमस्ते नमस्ते विभोविश्वमूर्ते


शंकर शिव भोले उमापति महादेव

शंकर शिव भोले उमापति महादेव

पालनहार परमेश्वर, विश्वरूप महादेव

पालनहार परमेश्वर, विश्वरूप महादेव

महादेव, महादेव, महादेव...


तत्व जगतभवती देवभवस्मरारे

त्वयेव तिस्टति जगन मिड्ड विश्वनाथ

तत्व जगतभवती देवभवस्मरारे

त्वयेव तिस्टति जगन मिड्ड विश्वनाथ

त्वयेव गच्छति लयम् जगदीश्वर

लिंगात्मकम हारस्चरात चरः विश्वरूपिंग

नमस्ते नमस्ते तपो योग गम्याः


शंकर शिव भोले उमापति महादेव

शंकर शिव भोले उमापति महादेव

पालनहार परमेश्वर, विश्वरूप महादेव

पालनहार परमेश्वर, विश्वरूप महादेव

महादेव, महादेव, महादेव...


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सुनो भवानी अरज हमारी, दया करो माँ कृपा करो माँ (Suno Bhawani Araj Hamari Daya Karo Maa Kripa Karo Maa)

सुनो भवानी अरज हमारी,
दया करो माँ कृपा करो माँ,

ऊँचे ऊँचे पहाड़ो पे, मैया जी का बसेरा है (Unche Unche Pahado Pe Maiya Ji Ka Basera Hai)

ऊँचे ऊँचे पहाड़ो पे,
मैया जी का बसेरा है,

ज्वारे और अखंड ज्योत की परंपरा

तैत्तिरीय उपनिषद में अन्न को देवता कहा गया है- अन्नं ब्रह्मेति व्यजानत्। साथ ही अन्न की निंदा और अवमानना ​​का निषेध किया गया है- अन्नं न निन्द्यात् तद् व्रत। ऋग्वेद में अनेक अनाजों का वर्णन है I

भगवान राम और माता शबरी के बीच का संवाद

जब बरसों के इंतजार के बाद श्रीराम शबरी की कुटिया में पहुंचे, तो उनके बीच एक अनोखा संवाद हुआ।

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