वृंदावनी वेणू (Vrindavani Venu)

वृंदावनी वेणु कवणाचा माये वाजे ।

वेणुनादें गोवर्धनु गाजे ॥


पुच्छ पसरूनि मयूर विराजे ।

मज पाहता भासती यादवराजे ॥


तृणचारा चरूं विसरली ।

गाई-व्याघ्र एके ठायीं जाली ।

पक्षीकुळें निवांत राहिलीं ।

वैरभाव समूळ विसरली ॥


वृंदावनी वेणु कवणाचा माये वाजे ।

वेणुनादें गोवर्धनु गाजे ॥


ध्वनी मंजुळ मंजुळ उमटती ।

वांकी रुणझुण रुणझुण वाजती ।

देव विमानीं बैसोनि स्तुती गाती ।

भानुदासा फावली प्रेम-भक्ति ॥


वृंदावनी वेणु कवणाचा माये वाजे ।

वेणुनादें गोवर्धनु गाजे ॥

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लाज रखो हे कृष्ण मुरारी (Laaj Rakho Hey Krishna Murari)

लाज रखो हे कृष्ण मुरारी,
हे गिरधारी हे बनवारी,

मुझे राधे नाम सुनाई दे (Mujhe Radhe Naam Sunai De)

राधे राधे! जय श्री राधे राधे...

गुड़ी पड़वा के दिन क्या करें क्या नहीं

गुड़ी पड़वा का पर्व हिंदू नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। यह त्योहार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है, जो इस साल 30 मार्च को पड़ रहा है।

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