दूर नगरी, बड़ी दूर नगरी (Door Nagari Badi Door Nagri)

दूर नगरी, बड़ी दूर नगरी

कैसे आऊं मैं कन्हैया,

तेरी गोकुल नगरी

कैसे आऊं मैं कन्हाई,

तेरी गोकुल नगरी

बड़ी दूर नगरी


कान्हा दूर नगरी, बड़ी दूर नगरी

कान्हा दूर नगरी, बड़ी दूर नगरी


रात में आऊं तो कान्हा, डर मोहे लागे

दिन में आऊं तो, देखे सारी नगरी

बड़ी दूर नगरी


कान्हा दूर नगरी, बड़ी दूर नगरी

कैसे आऊं मैं कन्हाई, तेरी गोकुल नगरी

बड़ी दूर नगरी


सखी संग आऊं कान्हा, शर्म मोहे लागे

अकेली आऊं तो भूल जाऊ डगरी

बड़ी दूर नगरी


कान्हा दूर नगरी, बड़ी दूर नगरी

कैसे आऊं मैं कन्हाई, तेरी गोकुल नगरी

बड़ी दूर नगरी


धीरे धीरे चालूँ कान्हा, कमर मोरी लचके

झटपट चालूँ तो छलकाए गगरी

बड़ी दूर नगरी


कान्हा दूर नगरी, बड़ी दूर नगरी

कैसे आऊं मैं कन्हाई, तेरी गोकुल नगरी

बड़ी दूर नगरी


कान्हा दूर नगरी, बड़ी दूर नगरी

कैसे आऊं मैं कन्हाई, तेरी गोकुल नगरी

बड़ी दूर नगरी

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कंस वध मनाने की परंपरा (Kans Vadh Manane Ki Parampara)

दीपोत्सव यानी दिवाली के ठीक 10वें दिन एक और पर्व मनाया जाता है, जो हमें सिखाता है कि कैसे हमेशा बुराई पर अच्छाई की विजय होती है।

अन्वाधान व इष्टि क्या है

सनातन हिंदू धर्म में, अन्वाधान व इष्टि दो प्रमुख अनुष्ठान हैं। जिसमें भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए किया करते हैं। इसमें प्रार्थना व पूजा कुछ समय के लिए यानी छोटी अवधि के लिए ही की जाती है।

माँ गौरी के लाल गजानन(Maa Gauri Ke Lal Gajanan)

माँ गौरी के लाल गजानन,
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ओ शंकरा मेरे शिव शंकरा (O Shankara Mere Shiv Shankara)

ओ शंकरा मेरे शिव शंकरा,
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