घनश्याम तुम ना आये, जीवन ये बीता जाये (Ghanshyam Tum Na Aaye Jeevan Ye Beeta Jaye)

घनश्याम तुम ना आये,

जीवन ये बीता जाये ॥


तेरा वियोग प्यारे,

अब तो सहा ना जाये,

एक बार आ भी जाओ,

बैठे हो क्यो छिपाये,

घनश्याम तुम ना आए,

जीवन ये बीता जाये ॥


मैं ढूढ़ती थी दर दर,

पर तुम नजर ना आये,

मुझे क्या पता था मेरे,

इस दिल में हो समाये

घनश्याम तुम ना आए,

जीवन ये बीता जाये ॥


जीवन की संध्या बेला,

अब आ चुकी हैं प्रीतम,

उस वक़्त आ भी जाना,

जब प्राण तन से जाये,

घनश्याम तुम ना आए,

जीवन ये बीता जाये ॥


घनश्याम तुम ना आये,

जीवन ये बीता जाये ॥

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तेरे चरणों में सर को, झुकाता रहूं(Tere Charno Mein Sir Ko Jhukata Rahu)

तेरे चरणों में सर को,
झुकाता रहूं,

तुम बिन मोरी कौन खबर ले गोवर्धन गिरधारी(Tum Bin Mori Kaun Khabar Le Govardhan Girdhari)

तुम बिन मोरी कौन खबर ले,
गोवर्धन गिरधारी,

उगादी त्योहार क्यों मनाया जाता है

उगादि दक्षिण भारत में एक महत्वपूर्ण नववर्ष उत्सव होता है। "उगादि" शब्द संस्कृत के "युग" अर्थात् "युग की शुरुआत" और "आदि" अर्थात् "आरंभ" से मिलकर बना है, जिसका अर्थ होता है नए युग का आरंभ।

प्रदोष व्रत क्यों रखा जाता है?

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। दरअसल, यह व्रत देवाधिदेव महादेव शिव को ही समर्पित है। प्रदोष व्रत हर माह में दो बार, शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है।

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