जीमो जीमो साँवरिया थे (Jeemo Jeemo Sanwariya Thye)

जीमो जीमो साँवरिया थे,

आओ भोग लगाओ जी,

बाँसुरिया की तान सुनाता,

छम छम करता आओ जी,

जीमो जीमो साँवरिया थे,

आओ भोग लगाओ जी ॥


माखन मिश्री मेवा मोदक,

मनचाया मिष्ठान जी,

रसगुल्ला रस भरी जलेबी,

छप्पन रस पकवान जी,

पूड़ी कचौड़ी खट्टी मीठी,

पूड़ी कचौड़ी खट्टी मीठी,

चटनी चाख बताओ जी,

जीमो जीमो सांवरिया थे,

आओ भोग लगाओ जी ॥


जो कुछ भी है आप री किरपा,

मेरी के औकात जी,

देवणीया थे लेवणिया मैं,

सिमरा दिन और रात जी,

दीनानाथ दयालु भगवन,

दीनानाथ दयालु भगवन,

आओ बैगा आओ जी,

जीमो जीमो सांवरिया थे,

आओ भोग लगाओ जी ॥


लहरी भाव भरोसो पुरो,

राखो माथे हाथ जी,

बरसाओ सांवरिया अब तो,

अमृत की बरसात जी,

सेवा में कोई भूल-चूक हो,

सेवा में कोई भूल-चूक हो,

सांवरिया बिसराओ जी,

जीमो जीमो सांवरिया थे,

आओ भोग लगाओ जी ॥


जीमो जीमो साँवरिया थे,

आओ भोग लगाओ जी,

बाँसुरिया की तान सुनाता,

छम छम करता आओ जी,

जीमो जीमो साँवरिया थे,

आओ भोग लगाओ जी ॥


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कनक भवन दरवाजे पड़े रहो (Kanak Bhawan Darwaje Pade Raho)

प्रभु श्रीसीतारामजी काटो कठिन कलेश
कनक भवन के द्वार पे परयो दीन राजेश

बंसी बजाय गयो श्याम (Bansi Bajaye Gayo Shyam)

बंसी बजाय गयो श्याम,
मोसे नैना मिलाय के,

मार्गशीर्ष पूर्णिमा कब मनाई जा रही

सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व है, और मार्गशीर्ष महीने की पूर्णिमा तिथि को साल की आखिरी पूर्णिमा तिथि होने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

प्रदोष व्रत के फायदे

प्रदोष व्रत त्रयोदशी के दिन रखा जाता है। इसलिए, इसे त्रयोदशी के नाम से भी जानते हैं। प्रत्येक महीने में दो प्रदोष व्रत पड़ते हैं। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान है।

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