महल को देख डरे सुदामा (Mahal Ko Dekh Dare Sudama)

महल को देख डरे सुदामा

का रे भई मोरी राम मड़ईया

कहाँ के भूप उतरे


इत उत भटकत,चहुँ ओर खोजत

मन में सोच करे

का रे भई मोरी राम मड़ईया

प्रभु से विनय करे


कनक अटारी चढ़ी बोली सुंदरी

काहे भटक रह्यो

सकल सम्पदा है गृह भीतर

दीनानाथ भरे


प्रथम द्वार गजराज विराजे

दूजे अश्व खड़े

तीजे द्वार विश्वकर्मा बैठे

हीरा-रतन जड़े


दीनानाथ तिन्हन के अंदर

जा पर कृपा करे

सूरदास प्रभु आस चरण की

दुःख दरिद्र हरे

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अरज सुणो बनवारी (Araj Suno Banwari)

अरज सुणो बनवारी सांवरियां म्हारी,
अरज सुणो बनवारी,

तेरी जय हों जय हों, जय गोरी लाल(Teri Jay Ho Jay Ho Jay Gauri Lal)

तेरी जय हो जय हो,
जय गोरी लाल ॥

भगवत गीता चालीसा ( Bhagwat Geeta Chalisa )

प्रथमहिं गुरुको शीश नवाऊँ | हरिचरणों में ध्यान लगाऊँ ||१||

सन्तान सप्तमी व्रत कथा (Santana Saptami Vrat Katha)

सन्तान सप्तमी व्रत कथा (यह भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को किया जाता है।) एक दिन महाराज युधिष्ठिर ने भगवान् से कहा कि हे प्रभो!

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