मेरे श्याम धणी की मोरछड़ी(Mere Shyam Dhani Ki Morchadi)

मेरे श्याम धणी की मोरछड़ी,

पल भर में जादू कर जाएगी,

गर फिर गई तेरे सर पे तो,

गर फिर गई तेरे सर पे तो,

हर बिगड़ी बात सवर जाएगी,

मेरे श्याम धनि की मोरछड़ी,

पल भर में जादू कर जाएगी ॥


प्रेम का है भूखा,

तू प्रेम मेरे सांवरे से कर जरा,

आएगा ना कोई तेरे काम,

बस मेरा श्याम आएगा सदा,

गर जो झुकेगा सर ये तेरा,

गर झुक जाए मस्तक तेरा,

माथे की रेख बदल जाएगी,

मेरे श्याम धनि की मोरछड़ी,

पल भर में जादू कर जाएगी ॥


कर नहीं मैं सकता महिमा मेरे,

घनश्याम की मुख से बयां,

आज तक क्या देखा,

कोई श्याम के दरबार से खाली गया,

बंद पड़ी किस्मत भी यहाँ,

तेरी बंद पड़ी किस्मत भी यहाँ,

खुशियों की चाबी से खुल जाएगी,

मेरे श्याम धनि की मोरछड़ी,

पल भर में जादू कर जाएगी ॥


दौड़ के आ जाए,

जो श्याम को दिल से पुकारे है कभी,

है ‘प्रकाश’ कहता,

बिना श्याम के कोई काम मुमकिन है नहीं,

उंगली पकड़ ली जबसे तेरी,

जो उंगली पकड़ ली जबसे तेरी,

मंजिल भी तुझको मिल जाएगी,

मेरे श्याम धनि की मोरछड़ी,

पल भर में जादू कर जाएगी ॥


मेरे श्याम धणी की मोरछड़ी,

पल भर में जादू कर जाएगी,

गर फिर गई तेरे सर पे तो,

गर फिर गई तेरे सर पे तो,

हर बिगड़ी बात सवर जाएगी,

मेरे श्याम धनि की मोरछड़ी,

पल भर में जादू कर जाएगी ॥


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बसाले मन मंदिर में राम (Basale Maan Mandir Me Ram)

बसाले मन मंदिर में राम,
बनेंगे बिगड़े तेरे काम,

शिव जी बिहाने चले, पालकी सजाई के (Shiv Ji Bihane Chale Paalki Sajaaye Ke)

शिव जी बिहाने चले,
पालकी सजाई के,

भक्तों के घर कभी, आजा शेरावाली (Bhakton Ke Ghar Kabhi Aaja Sherawali)

भक्तों के घर कभी,
आजा शेरावाली,

कार्तिगाई दीपम उत्सव से जुड़ी पौराणिक कथा

कार्तिगाई दीपम उत्सव दक्षिण भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जो भगवान कार्तिकेय और शिव को समर्पित है। यह उत्सव तमिल माह कार्तिगाई की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है, जो उत्तर भारतीय कैलेंडर के अनुसार मार्गशीर्ष महीने की पूर्णिमा तिथि को आयोजित होता है।

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