मुझ पर भी दया की कर दो नज़र(Mujh Par Bhi Daya Ki Kardo Najar)

मुझ पर भी दया की कर दो नज़र,

ऐ श्याम सुंदर. ऐ मुरलीधर ।

कुछ दीनों के दुःख की ले लो खबर,

ऐ श्याम सुंदर ऐ मुरलीधर ।

आरत जन तुमको पुकार रहे हैं,

आने की बाट निहार रहे हैं ।

सिर छिपा के यहाँ बैठे नटवर,

ऐ श्याम सुंदर ऐ मुरलीधर ।


मुझ पर भी दया की कर दो नज़र,

ऐ श्याम सुंदर. ऐ मुरलीधर ।


ब्रजबाला व्याकुल रहती है,

ग्वालों की टोली कहती है ।

कब आओगे कान्हा कुँवर बनकर,

ऐ श्याम सुंदर ऐ मुरलीधर ।


मुझ पर भी दया की कर दो नज़र,

ऐ श्याम सुंदर. ऐ मुरलीधर ।


जिस बंसी ने प्रेमप्रकाश किया,

रसदायक रास बिलास किया ।

बज जाए वही बंसी घर-घर,

ऐ श्याम सुंदर ऐ मुरलीधर ।


मुझ पर भी दया की कर दो नज़र,

ऐ श्याम सुंदर. ऐ मुरलीधर ।


बिसरा दो इन्हें या सम्हालो इन्हें,

ठुकरा दो चाहे अपना लो इन्हें ।

दृग बिन्दु हैं आपके पेशे नज़र,

ऐ श्याम सुंदर ऐ मुरलीधर ।


मुझ पर भी दया की कर दो नज़र,

ऐ श्याम सुंदर. ऐ मुरलीधर ।


मुझ पर भी दया की कर दो नज़र,

ऐ श्याम सुंदर. ऐ मुरलीधर ।

कुछ दीनों के दुःख की ले लो खबर,

ऐ श्याम सुंदर ऐ मुरलीधर ।

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मेरे ओ सांवरे, तूने क्या क्या नहीं किया (Mere O Sanware Tune Kya Kya Nahi Kiya)

मेरे ओ सांवरे,
तूने क्या क्या नहीं किया,

रुक्मिणी अष्टमी की कथा

पौष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रुक्मिणी अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी देवी रुक्मिणी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। देवी रुक्मिणी मां लक्ष्मी का अवतार मानी जाती हैं और भगवान श्रीकृष्ण की आठ पटरानियों में से एक थीं।

नर्मदा जयंती उपाय

गंगा नदी की तरह ही मां नर्मदा को भी बहुत ही पवित्र और पूजनीय माना गया है। भारत में छोटी-बड़ी 200 से अधिक नदियां हैं, जिसमें पांच बड़ी नदियों में नर्मदा भी एक है। इतना ही नहीं, मान्यता है कि नर्मदा के स्पर्श से ही पाप मिट जाते हैं। इसलिए, प्रतिवर्ष माघ महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को नर्मदा जयंती मनाई जाती है।

छोटो सो बंदर हद करिग्यो (Chhoto So Bander Had Karigyo)

छोटो सो बंदर हद करिग्यो
सावामणि का लड्डू सारा चट करिगयो ॥

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