मुझ पर भी दया की कर दो नज़र(Mujh Par Bhi Daya Ki Kardo Najar)

मुझ पर भी दया की कर दो नज़र,

ऐ श्याम सुंदर. ऐ मुरलीधर ।

कुछ दीनों के दुःख की ले लो खबर,

ऐ श्याम सुंदर ऐ मुरलीधर ।

आरत जन तुमको पुकार रहे हैं,

आने की बाट निहार रहे हैं ।

सिर छिपा के यहाँ बैठे नटवर,

ऐ श्याम सुंदर ऐ मुरलीधर ।


मुझ पर भी दया की कर दो नज़र,

ऐ श्याम सुंदर. ऐ मुरलीधर ।


ब्रजबाला व्याकुल रहती है,

ग्वालों की टोली कहती है ।

कब आओगे कान्हा कुँवर बनकर,

ऐ श्याम सुंदर ऐ मुरलीधर ।


मुझ पर भी दया की कर दो नज़र,

ऐ श्याम सुंदर. ऐ मुरलीधर ।


जिस बंसी ने प्रेमप्रकाश किया,

रसदायक रास बिलास किया ।

बज जाए वही बंसी घर-घर,

ऐ श्याम सुंदर ऐ मुरलीधर ।


मुझ पर भी दया की कर दो नज़र,

ऐ श्याम सुंदर. ऐ मुरलीधर ।


बिसरा दो इन्हें या सम्हालो इन्हें,

ठुकरा दो चाहे अपना लो इन्हें ।

दृग बिन्दु हैं आपके पेशे नज़र,

ऐ श्याम सुंदर ऐ मुरलीधर ।


मुझ पर भी दया की कर दो नज़र,

ऐ श्याम सुंदर. ऐ मुरलीधर ।


मुझ पर भी दया की कर दो नज़र,

ऐ श्याम सुंदर. ऐ मुरलीधर ।

कुछ दीनों के दुःख की ले लो खबर,

ऐ श्याम सुंदर ऐ मुरलीधर ।

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माघ महीने में कब और क्यों मनाई जाती है कुंभ संक्रांति?

आत्मा के कारक सूर्य देव हर महीने एक राशि से दूसरी राशि में संक्रमण करते हैं। सूर्य देव के इस राशि परिवर्तन को ही संक्रांति कहते हैं। हर संक्रांति का अपना खास महत्व होता है और इसे धूमधाम से मनाया जाता है।

तेरे पावन माँ नवरात्रों में, ज्योत तेरी जगाए हुए हैं: भजन (Tere Paawan Maa Navratron Main Jyot Teri Jagaye Huye Hai)

तेरे पावन माँ नवरात्रों में,
ज्योत तेरी जगाए हुए हैं,

जो करते रहोगे भजन धीरे धीरे (Jo Karte Rahoge Bhajan Dhire Dhire)

जो करते रहोगे भजन धीरे धीरे ।
तो मिल जायेगा वो सजन धीरे धीरे ।

श्री गणेश स्तोत्रम्

कैलाशपर्वते रम्ये शम्भुं चन्द्रार्धशेखरम्।
षडाम्नायसमायुक्तं पप्रच्छ नगकन्यका॥

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