तुम रूठे रहो मोहन (Tum Ruthe Raho Mohan)

तुम रूठे रहो मोहन,

हम तुम्हे मना लेंगे,

आहों मे असर होगा,

घर बैठे बुला लेंगे,

तुम रूठे रहों मोहन,

हम तुम्हे मना लेंगे ॥


तुम कहते हो मोहन,

हमें मधुबन प्यारा है,

इक बार तो आ जाओ,

मधुबन ही बना देंगे,

तुम रूठे रहों मोहन,

हम तुम्हे मना लेंगे ॥


तुम कहते हो मोहन,

हमें राधा प्यारी है,

इक बार तो आ जाओ,

राधा से मिला देंगे,

तुम रूठे रहों मोहन,

हम तुम्हे मना लेंगे ॥


तुम कहते हो मोहन,

हमें माखन प्यारा है,

इक बार तो आ जाओ,

माखन ही खिला देंगे,

तुम रूठे रहों मोहन,

हम तुम्हे मना लेंगे ॥


तुम कहते हो मोहन,

हमें कहाँ बिठाओगे,

इस दिल में तो आ जाओ,

पलकों पे बिठा लेंगे,

तुम रूठे रहों मोहन,

हम तुम्हे मना लेंगे ॥


तुम हमको ना चाहो,

इसकी हमें परवाह नही,

हम वादे के पक्के है,

तुम्हे अपना बना लेंगे,

तुम रूठे रहों मोहन,

हम तुम्हे मना लेंगे ॥


तुम रूठे रहो मोहन,

हम तुम्हे मना लेंगे,

आहों मे असर होगा,

घर बैठे बुला लेंगे,

तुम रूठे रहों मोहन,

हम तुम्हे मना लेंगे ॥


लगी आग जो सीने में,

तेरी प्रेम जुदाई की,

हम प्रेम की धारा से,

लगी दिल की बुझा लेंगे,

तुम रूठे रहों मोहन,

हम तुम्हे मना लेंगे ॥


तुम रूठे रहो मोहन,

हम तुम्हे मना लेंगे,

आहों मे असर होगा,

घर बैठे बुला लेंगे,

तुम रूठे रहों मोहन,

हम तुम्हे मना लेंगे ॥

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Ganpati Ji Ganesh Nu Manaiye (गणपति जी गणेश नू मनाइये)

गणपति जी गणेश नू मनाइये,
सारे काम रास होणगे,

मुझे तूने मालिक, बहुत कुछ दिया है (Mujhe Tune Malik Bahut Kuch Diya Hai)

मुझे तूने मालिक,
बहुत कुछ दिया है ।

भीष्म द्वादशी पौराणिक कथा

पुराणों के अनुसार महाभारत युद्ध में अर्जुन ने भीष्म पितामह को बाणों की शैय्या पर लिटा दिया था। उस समय सूर्य दक्षिणायन था। तब भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार करते हुए माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन प्राण त्याग दिए थे।

जय जय गणपति गजानंद, तेरी जय होवे (Jai Jai Ganpati Gajanand Teri Jai Hove)

जय जय गणपति गजानंद,
तेरी जय होवे,

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