अब किसी महफिल में जाने (Ab Kisi Mehfil Me )

अब किसी महफिल में जाने,

की हमें फुर्सत नहीं,

दुनिया वालो को मनाने,

की हमें फुर्सत नहीं ॥


एक दिल है जिसमे मेरा,

बस गया है सांवरा,

अब कही दिल को लगाने,

की हमें फुर्सत नहीं ।


​अब किसी महफिल मे जाने,

की हमें फुर्सत नहीं,

दुनिया वालो को मनाने,

की हमें फुर्सत नहीं ॥


ये जो आंखे है हमारी,

मिल गयी है श्याम से,

अब कही आँखे मिलाने,

की हमें फुर्सत नहीं ।


​अब किसी महफिल मे जाने,

की हमें फुर्सत नहीं,

दुनिया वालो को मनाने,

की हमें फुर्सत नहीं ॥


एक सर है झुक गया जो,

आपके दरबार में,

अब कही सर को झुकाने,

की हमें फुर्सत नहीं ।


​अब किसी महफिल मे जाने,

की हमें फुर्सत नहीं,

दुनिया वालो को मनाने,

की हमें फुर्सत नहीं ॥

BhaktiBharat Lyrics


​अब किसी महफ़िल में जाने,

की हमें फुर्सत नहीं,

दुनिया वालो को मनाने,

की हमें फुर्सत नहीं ॥

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सोमवार की पूजा विधि

हिंदू धर्म में सोमवार का दिन विशेष महत्व रखता है। इसे "सोमवार" या "सप्तमी" के नाम से जाना जाता है, और यह विशेष रूप से भगवान शिव और चंद्रमा यानी कि सोम से जुड़ा हुआ है।

मेरी विपदा टाल दो आकर (Meri Vipda Taal Do Aakar)

मेरी विपदा टाल दो आकर,
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ब्रज होली की पौराणिक कथा

होली का नाम सुनते ही हमारे मन में रंगों की खुशबू, उत्साह और व्यंजनों की खुशबू बस जाती है। यह भारत के सबसे पुराने और सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है, लेकिन इसकी उत्पत्ति के बारे में कोई निश्चित जानकारी नहीं है। हालांकि, होली से जुड़ी कई किंवदंतियां हैं।

बंसी वाले के चरणों में, सर हो मेरा (Bansi Wale Ke Charno Me, Sar Ho Mera)

बंसी वाले के चरणों में, सर हो मेरा,
फिर ना पूछो, कि उस वक्त क्या बात है ।

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