फागण को महीनो, लिख दीन्यो बाबा जी के नाम (Fagan Ko Mahino Likh Dino Baba Ji Ke Naam)

फागण को महीनो,

लिख दीन्यो बाबा जी के नाम,

कोई काम नहीं दूजो,

बस बोलां जय श्री श्याम ॥

खाटू की नगरिया,

सजगी निराली जी,

गलियां गलियां गूंजे,

म्हारे श्याम धणी रो नाम ॥


बेगा सा चालो,

श्याम धणी के द्वार,

बाबो बैठ्यो बैठ्यो,

जोवे टाबरिया री बाट ॥


ऐसो तो नज़ारो,

देख्यो सुन्यो ना कोई द्वार,

है स्वर्ग से भी सुन्दर,

म्हारे श्याम धणी रो धाम ॥


फागण को महीनो,

लिख दीन्यो बाबा जी के नाम,

कोई काम नहीं दूजो,

बस बोलां जय श्री श्याम ॥


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विद्यारंभ संस्कार पूजा विधि

हिंदू संस्कृति में मनुष्य के जीवन के अलग अलग पड़ावों को संस्कारों के साथ पवित्र बनाया जाता है। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण संस्कार है विद्यारंभ संस्कार । यह संस्कार बच्चों के जीवन में शिक्षा की शुरुआत का प्रतीक है।

उंचिया पहाड़ा वाली माँ, हो अम्बे रानी (Uchiya Pahadawali Maa O Ambe Rani)

उंचिया पहाड़ा वाली माँ,
हो अम्बे रानी,

जयकारा, मेरे केदारेश्वराय जय कारा (JaiKara Mere Kedareshwaray Jai Kara)

संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम्,
सदावसन्तं हृदयारविन्दे,

भगवान बुद्ध वन्दना (Bhagwan Buddha Vandana)

नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मा सम्बुद्धस्स ।
नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मा सम्बुद्धस्स ।

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