गोविंद चले चरावन धेनु(Govind Chale Charaavan Dhenu)

गोविंद चले चरावन धेनु ।

गृह गृह तें लरिका सब टेरे

शृंगी मधुर बजाई बेनु ॥


सुरभी संग सोभित द्वै भैया

लटकत चलत नचावत नेंन ।

गोप वधू देखन सब निकसीं

कियो संकेत बताई सेंन ॥

ब्रजपति जब तें बन पाउँ धारे

न परत ब्रजजन पल री चैन ।

तजि गृह काज विकली सी डोलत

दिन अरि जाए हो एक बैन ।

जसोमति पाक परोसि कहति सखि

तूं ले जाउ बेगि इह देंन ।

गोविंद लिए बिरहनी दौरी,

तलफत जैसे जल बिनु मेंन ॥


गोविंद चले चरावन धेनु ।

गृह गृह तें लरिका सब टेरे

शृंगी मधुर बजाई बेनु ॥

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ऊँचे पर्वत चढ़कर जो, तेरे मंदिर आते हैं (Unche Parvat Chadhkar Jo Tere Mandir Aate Hain)

ऊँचे पर्वत चढ़कर जो,
तेरे मंदिर आते हैं,

गिरा जा रहा हूँ, उठा लो उठा लो(Gira Ja Raha Hu Utha Lo)

प्रभु अपने दर से, अब तो ना टालो,
गिरा जा रहा हूँ, उठा लो उठा लो,

बांके बिहारी लाल, तेरी जय होवे (Banke Bihari Laal, Teri Jai Hove)

बांके बिहारी लाल,
तेरी जय होवे,

फरवरी 2025 पहला प्रदोष व्रत

साल 2025 के फरवरी माह में प्रदोष व्रत से लेकर महाशिवरात्रि जैसे बड़े पर्व हैं। इसलिए, यह महीना भोलेनाथ और माता पार्वती की कृपा के लिए बेहद शुभ है।

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