नंद रानी तेरो लाला जबर भयो रे(Nand Rani Tero Lala Zabar Bhayo Re)

नंद रानी तेरो लाला जबर भयो रे/री

महारानी तेरो लाला जबर भयो रे/री

मेरी मटकी उलट के पलट गयो रे/री ।


मुस्कान याकी लगे प्यारी प्यारी

पागल भयी यहाँ के सगरी ब्रजनारी

याकी बंशी पे जियरा अटक गयो रे ॥

॥ नंद रानी तेरो लाला जबर भयो रे..॥


पनघट पे आके करे जोर जोरी

चुपके से आके करे चित चोरी

मैया हल्ला मचो तो सटक गयो री ॥

॥ नंद रानी तेरो लाला जबर भयो रे..॥


घर घर में आकर के माखन चुरावे

खावे सो खावे जमी पे गिरावे

याको रोकबो हमारो खटक गयो री ॥

॥ नंद रानी तेरो लाला जबर भयो रे..॥


मैं तो दुखारी गरीब की मारी

जोर नहीं चलो तो दीन्ही रे गारी

मैया पैया कन्हिया चटक गयो री ॥


नंद रानी तेरो लाला जबर भयो रे/री

मेरी मटकी उलट के पलट गयो रे/री ।

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कैसे भूलूंगा दादी मैं तेरा उपकार (Kaise Bhulunga Dadi Main Tera Upkar)

कैसे भूलूंगा दादी मैं तेरा उपकार,
ऋणी रहेगा तेरा,

रुक्मिणी अष्टमी की कथा

पौष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रुक्मिणी अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी देवी रुक्मिणी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। देवी रुक्मिणी मां लक्ष्मी का अवतार मानी जाती हैं और भगवान श्रीकृष्ण की आठ पटरानियों में से एक थीं।

शंभू ये तेरी माया, कहीं है धूप कहीं है छाया(Shambhu Ye Teri M aya Kahin Hai Dhup Kahin Hai Chaya)

शंभू ये तेरी माया,
कहीं है धूप कहीं है छाया,

श्री कृष्ण चालीसा ( Shri Krishna Chalisa)

बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम ।
अरुण अधर जनु बिम्बफल, नयन कमल अभिराम ॥

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