जगदीश ज्ञान दाता(Jagadish Gyan Data: Prarthana)

जगदीश ज्ञान दाता, सुख मूल शोकहारी ।

भगवन् ! तुम्हीं सदा हो, निष्पक्ष न्यायकारी ॥


सब काल सर्व ज्ञाता, सविता पिता विधाता ।

सब में रमे हुए हो, विश्व के बिहारी ॥


कर दो बलिष्ठ आत्मा, घबरायें न दुःखों से ।

कठिनाइयों का जिससे, तर जायें सिन्धु भारी ॥


निश्चय दया करोगे, हम मांगते यही हैं ।

हमको मिले स्वयम् ही, उठने की शक्ति सारी ॥


जगदीश ज्ञान दाता, सुख मूल शोकहारी ।

भगवन् ! तुम्हीं सदा हो, निष्पक्ष न्यायकारी ॥

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कोई ऐसी खोल नहीं है (Koi Aisi Khol Nahin)

कोई ऐसी खोल नहीं है,
जिसमें तू छुप पायेगा ॥

कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे - भजन (Kanhaiya Kanhaiya Pukara Karenge Lataon Me Brij Ki Gujara Karenge)

कन्हैया कन्हैया पुकारा करेंगे,
लताओं में बृज की गुजारा करेंगे।

धारा तो बह रही है (Dhara Too Beh Rahi Hai)

धारा तो बह रही है,
श्री राधा नाम की,

मैं नहीं, मेरा नहीं, यह तन - भजन (Main Nahi Mera Nahi Ye Tan)

मैं कितना अधम हूँ,
ये तुम ही जानो,

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